हमारे देश में शिक्षित युवा वर्ग को बेरोजगारी की एक गहन समस्या है, बावजूद इसके कि इस समस्या के निवारण के लिए बहुत प्रयास किए गए हैं । यह समस्या ग्रामीण क्षेत्र में और भी जटिल हो जाती है, क्योंकि हमारी जनसंख्या का एक बहुत बडा़ भाग आज भी गांवों में रहता है । युवा शक्ति को यदि उचित प्रेरणा दी जाए, सही दिशा निर्देशन प्रदान किया जाए एवं उनमें तकनीकी योग्यताओं का विकास किया जाए तो देश के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । हमारे देश का आर्थिक विकास तभी संभव होगा जब इस वर्ग को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे ।

" 3 से 5 वर्ष तक स्नातक स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के बाद किसी अन्य के यहाँ नोकरी कर उसकी लेखा पुस्तकें लिखने से अच्छा है की अपना कार्य कर स्वयं की लेखा पुस्तकें लिखी जाए " यह विचारधारा है, धर्माधिकारी डा. डी. वीरेन्द्र हेग्ग्ड़े, अध्यक्ष, रुडसेट संस्थान की, जिनकी इस संस्थान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। "पद्म्भूषण" डा. डी. वीरेन्द्र हेग्ग्ड़े ने सर्वप्रथम ऐसी संस्था की स्थपाना करने की सोची जिसमे बेरोजगार व्यक्तियों को विभिन्न विषयों में प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे वे स्वरोजगार प्राप्त कर सकें।


डा. हेग्ग्ड़े की इसी विचारधारा से सहमत दो प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक - सिंडिकेट बैंक तथा केनरा बैंक

रुडसेट संस्थान की स्थापना 1982 में कर्नाटक राज्य के दक्षिण कन्नड़ जिले के एक छोटे से गाँव उजिरै में श्री धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर शिक्षण न्यास, सिंडिकेट बैंक तथा केनरा बैंक द्वारा हुई ।

इस संस्था की आज देश भर में 27 शाखाएं स्थापित हो चुकी हैं :-
महाराष्ट्र 1 कर्नाटक 7
आसाम 1 झारखण्ड 1
त्रिपुरा 1 उड़ीसा 1
आंध्रप्रदेश 2 पंजाब 1
केरल 1 मध्यप्रदेश 1
तमिलनाडु 1 गुजरात 1
हरियाणा 1 उत्तरप्रदेश 2
बिहार 1 प . बंगाल 1
राजस्थान 3
From Desk

Dr. D. Veerendra Heggade
President, Rudset Institutes

“ Instead of writing someone else’s account through wage employment after three to five years of collegiate education, it is more meaningful to write one’s own account by embarking upon some self-employment "
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